उत्तर प्रदेश की राजनीति में गाय और गंगा दोनो का बहुत महत्व है. गाय को सडक पर आने से रोकने के लिये पीडब्ल्यूडी विभाग ने अपने ही इंजीनियरों को रस्सी लेकर छुट्टा जानवरों को पकडने का आदेश जारी किया तो शिक्षा विभाग ने अपने स्कूल में खाना बनाने का काम करने वाले रसोइयों और शिक्षकों को कहा है कि वह गंगा यात्रा करने वालों को खाना खिलानेे की जिम्मेदारी संभाले. इस तरह के आदेश से शिक्षक और इंजीनियरों में असंतोष में है. मजेदार बात यह है कि आलोचनाओं के बाद एक आदेश लिखित में वापस होता है तो दूसरा आदेश जारी हो जाता है. छुट्टा जानवर पकडने का आदेश वापस हुआ तो अगले ही दिन गंगा यात्रा करने वालों को खाने खिलाने का आदेश जारी हो गया.

शिक्षा विभाग से जारी हुआ आदेश हरदोई जिले से जुडा हुआ है. जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी हरदोई के द्वारा यह आदेश जारी हुआ है. इसमें लिखा है कि ‘गंगा यात्रा के आयोजन में गंगा किनारे स्थित ग्राम पंचायतों में 30 जनवरी को गंगा दल यात्री प्रवास करेगे. गंगा दल के ठहरने, नाश्ते और आदि की व्यवस्था विद्यालयों में कार्यरत शि़क्षकों और रसोइयों द्वारा की जानी है.‘ आदेश में ही बिलग्राम और सांडी ब्लाक में आने वाले स्कूलों के नाम भी लिखे है. शिक्षा विभाग का कोई भी अधिकारी और कर्मचारी इस आदेश पर बोलने को तैयार नहीं है. यह पत्र खंड शिक्षा अधिकारी बिलग्राम और सांडी के द्वारा जारी किया गया है.

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गंगा यात्रा की शुरूआत उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के द्वारा 27 जनवरी को बिजनौर और राज्यपाल आंनदी बेन ने बलिया से शुरू की गई. गंगा यात्रा दो हिस्सो में पूरी हो रही है. गंगा यात्रा को सफल बनाने के लिये पार्टी और सरकार स्तर पर काम किया जा रहा है. बिजनौर से कानपुर बैराज तक यह यात्रा 579 किलोमीटर लंबी सडक मार्ग से गुजरेगी. 657 किलोमीटर बलिया से कानुपर तक यह यात्रा गुजरेगी. कुल 1338 किलोमीटर यात्रा 27 जिलों से होकर निकल रही है. इसमें 21 नगर पंचायत और 1038 ग्राम पंचायते पडेगी. उत्तर प्रदेश में गंगा की कुल लंबाई 1140 किलोमीटर है. पावन गंगा यात्रा के व्यापक प्रचार प्रसार की व्यवस्था भी गई है.

हरदोई शिक्षा विभाग के पत्र से पता चलता है कि लोगो के खाने की व्यवस्था स्कूलों को सौंपी गई है. इस आदेश से स्कूल में पढाने वाले शिक्षको की हालत के बारे पता चलता है. शिक्षकों से पढाने के अलावा बहुत सारे काम लिये जाते है. इस बात को लेकर शिक्षकों में गुस्सा भी है. पर खुलकर वह कह नहीं पा रहे. शिक्षकों की यह हालत तब है जब उत्तर प्रदेश के दो डिप्टी सीएम में से एक डाक्टर दिनेश शर्मा खुद लखनऊ विश्वविद्यालय में शिक्षक है. शिक्षकों को उम्मीद थी कि वह शिक्षकों की मजबूरियों को समझते होगे. इसके बाद भी कभी शिक्षकों की डयूटी दुल्हनों को सजाने पर लगा दिया जाता है तो कभी गंगा दल के खाने की व्यवस्था को देखने के लिये.

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