मै जब तक अफसर रहा, हमेशा ऐश के ही बारे में ही सोचता रहा. मेरा विश्वास, मेरा ईमान, मेरा धर्म और मेरी इंसानियत सब ऐशपरस्ती में डूबी रही. लेकिन एक घटना ने मुझे ऐसा शर्मिंदा किया कि जब भी वह घटना याद आती है, मैं सिहर उठता हूं. हुआ यह था कि मैं उस दिन पत्नी के बारबार कहने पर उस के साथ बाजार तक चला गया था. मैं ने जैसे ही कार शौपिंग सेंटर के बाहर रोकी, मेरी कार के पास एक औरत आ कर खड़ी हो गई. मैं जैसे ही कार से उतरा, वह मेरी ओर लपकी. मेरे देखते ही देखते एकदम से झुक कर उस ने मेरे दोनों पैर पकड़ लिए.

‘‘अरे…अरे… कौन हो तुम, यह क्या कर रही हो. पीछे हटो.’’ मैं ने पीछे हटते हुए कहा.

‘‘क्या बात है बहन?’’ मेरी पत्नी ने पास जा कर उस औरत के कंधे पर हाथ रख कर पूछा.

औरत ने एक बार मेरी पत्नी की ओर देखा, उस के बाद दोनों हाथ जोड़ कर वह याचक दृष्टि से मेरी ओर देखने लगी. मुझे लगा, यह कोई मांगने वाली है. इस तरह के बाजारों में मांगने वाले घूमते भी रहते हैं. लेकिन यह औरत उन से एकदम अलग लग रही थी. उस ने साफसुथरी साड़ी बड़े सलीके से पहन रखी थी. उस ने आंखों तक घूंघट भी कर रखा था. देखने में भी ऐसी खूबसूरत थी कि किसी भी मर्द का दिल आ जाए.

अगर वह याचक दृष्टि के बजाए मुझे प्यार भरी दृष्टि से देख रही होती तो मैं बिना सोचसमझे उस पर मर मिटता. उस का चेहरा काफी आकर्षक था. रंग भी गोरा था. लेकिन पत्नी के साथ होने की वजह से चाह कर भी मैं उस की ओर ज्यादा देर तक नहीं देख सका था.

‘‘लो ये रख लो.’’ पत्नी की इस बात पर मैं चौंका. वह 5 रुपए का नोट उस औरत की ओर बढ़ाते हुए कह रही थीं, ‘‘इसे रख लो और हमें जाने दो.’’

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औरत बिना रुपए लिए पीछे हट गई.  पत्नी ने कई बार कहा तो उस ने हाथ जोड़ कर इनकार में सिर हिला दिया और याचक दृष्टि से मुझे इस तरह ताकती रही, जैसे कह रही हो कि मेरी हालत पर दया करो. मुझे लगा कि शायद वह भीख मांगने का नया तरीका है. शायद वह 5 रुपए से ज्यादा चाहती है.

इसलिए मैं ने उसे दुत्कारने वाले अंदाज में कहा, ‘‘हट सामने से, तुम जैसे लोगों को एक पैसा नहीं देना चाहिए. यह नहीं कि जो मिल रहा है, उसे ले कर हट जाएं.’’

‘‘अरे, आप तो नाराज हो गए.’’ मेरी पत्नी ने मेरा हाथ थाम कर कहा, ‘‘ऐसा नहीं कहते. गरीबों की हाय लेना अच्छी बात नहीं है.’’

इस के बाद उस ने औरत से कहा, ‘‘बहन, ये लो 5 रुपए और हमें जाने दो.’’

औरत हमारे सामने से हट तो गई, लेकिन मैं ने देखा, उस की आंखों में आंसू आ गए थे. उस ने रुपए नहीं लिए थे. हम दोनों आगे बढ़ गए. पत्नी ने शौपिंग सेंटर में दाखिल होते हुए कहा, ‘‘मेरा ख्याल है कि वह भीख मांगने वाली नहीं है. आप अफसर हैं, हो सकता है आप से कोई काम कराना चाहती हो?’’

‘‘मेरे माथे पर कहां लिखा है कि मैं अफसर हूं.’’ मैं ने खीझते हुए कहा.

‘‘आप इतने गुमनाम भी नहीं हैं. यह भी संभव है कि उस ने आप को आप के औफिस में देखा हो.’’ पत्नी ने कहा.

‘‘देखा होगा भई,’’ मैं ने उकताते हुए कहा, ‘‘अब तुम उसे छोड़ो और अपना काम करो.’’

थोड़ी देर बाद हम जैसे ही शौपिंग सेंटर से बाहर आए, वह फिर हमारे सामने पहले की ही तरह हाथ जोड़ कर खड़ी हो गई. उस की आंखों से आंसू बह रहे थे और होंठ इस तरह कांप रहे थे, जैसे वह कुछ कहना चाहती हो. लेकिन भावनाओं में बह कर उस की जुबान से शब्द न निकल रहे हों.

उसे हैरानी से देखते हुए मैं ने दस का नोट निकाल कर उस की ओर बढ़ाया तो उस ने लेने से मना कर दिया. मैं ने कहा, ‘‘जब पैसे नहीं लेने तो यह नाटक क्यों कर रही हो?’’

‘‘इस तरह बात न करें.’’ पत्नी ने मेरे चेहरे को पढ़ने की कोशिश करते हुए कहा.

‘‘बहन अगर ये कम है तो मैं और दे देती हूं, लेकिन तुम रोना बंद कर दो.’’

इतना कह कर मेरी पत्नी ने जैसे ही पर्स खोला, उस ने हाथ के इशारे से मना कर दिया. वह जिस तरह रो रही थी, उसे देख कर मेरी पत्नी काफी दुखी हो गई थीं. मुझे लगा, हम कुछ देर और यहां रुके रहे तो मेरी पत्नी भी रो देंगी.

हमारे पास से गुजरने वाले लोग रुकरुक कर दृश्य को देख रहे थे, जिस से मुझे उलझन सी हो रही थी. नाराज हो कर मैं ने थोड़ा तेज स्वर में कहा, ‘‘तुम क्या चाहती हो, यह मेरी समझ में नहीं आ रहा है. न तुम पैसे ले रही हो और न यह बता रही हो कि तुम्हें चाहिए क्या?’’

इतना कह कर मैं ने पत्नी का हाथ थामा और तेजी से अपनी गाड़ी की तरफ बढ़ गया. मेरे साथ चलते हुए पत्नी ने कहा, ‘‘पता नहीं बेचारी क्या चाहती है? कोई तो बात होगी, जो वह इस तरह रो रही है. लेकिन ताज्जुब की बात यह है कि पूछने पर कुछ नहीं बता भी नहीं रही है.’’

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‘‘छोड़ो, अब उस की बातें खत्म करो.’’ मैं ने झल्लाते हुए कहा.

हालांकि मैं खुद उसी औरत के बारे में सोच रहा था, लेकिन मेरे सोचने का नजरिया कुछ और था. वह काफी सुंदर थी. रोते हुए वह और भी सुंदर लग रही थी. साड़ी में उस का शरीर काफी आकर्षक लग रहा था. अगर वह रोने के बजाए ढंग से बात करती तो मैं उसे औफिस आने को जरूर कहता. पैसे न लेने से मैं समझ गया था कि वह भीख मांगने वाली नहीं थी. वह किसी दूसरे ही मकसद से आई थी.

‘‘अब आप क्या सोचने लगे?’’ पत्नी ने थोड़ी ऊंची आवाज में पूछा.

‘‘कुछ नहीं, सोचना क्या है? शाम को औफिस की जो मीटिंग होने वाली है, उसी के बारे में सोच रहा था.’’ मैं ने धीमे से कहा.

‘‘कार चलाते हुए ज्यादा कुछ न सोचा करें, क्योंकि सोचते समय कुछ नजर नहीं आता.’’ पत्नी ने यह बात इस तरह कही, जैसे मैं कोई बच्चा हूं और वह मुझे समझा रही हो.

अगले दिन सबेरे मैं औफिस जाने के लिए  घर से निकला तो यह देख कर हैरान रह गया कि वही औरत कोठी के गेट से सटी खड़ी थी. उस के साथ एक लड़का भी था. गेट से निकल कर जैसे ही मैं कार की ओर बढ़ा, औरत मेरे सामने आ कर खड़ी हो गई. कल की तरह उस समय भी उस ने दोनों हाथ जोड़ रखे थे और याचनाभरी नजरों से मेरी ओर ताक रही थी.

उस समय मेरे साथ पत्नी नहीं थी, इसलिए मैं ने औरत को गौर से देखा. सचमुच वह बहुत सुंदर थी. मैं कुछ कहता, उस के पहले ही उस ने झुक कर मेरे पैर पकड़ लिए.

‘‘क्या बात है भई, तुम बताती क्यों नहीं?’’ मैं ने उसे बांहों से पकड़ कर खड़ा करने की कोशिश करते हुए कहा. उस की बांहें बहुत कोमल थीं. मुझे सिहरन सी हुई. मैं ने कहा, ‘‘मैं औफिस जा रहा हूं, जो कुछ भी कहना है, जल्दी कहो.’’

‘‘साहब, हम कई दिनों से आप के औफिस के चक्कर लगा रहे हैं.’’ औरत के बजाए उस के साथ खड़े लड़के ने कहा, ‘‘लेकिन आप का चपरासी…’’

‘‘बात क्या है, बताओ. चपरासी की छोड़ो.’’ मैं ने लड़के की बात काटते हुए कहा. लेकिन मेरी नजरें औरत के चेहरे पर ही जमी थीं.

‘‘इन के पति…’’ लड़के ने कहा, ‘‘जो रिश्ते में मेरे मामा लगते हैं.’’

‘‘तुम रिश्ते की बात छोड़ो, काम की बात करो.’’ मैं ने डांटने वाले अंदाज में कहा.

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‘‘जी, इन के पति यानी मेरे मामा को पुलिस ने बिना किसी अपराध के पकड़ लिया है. उन्हीं को छुड़ाने के लिए यह कई दिनों से आप के पास आ रही हैं.’’ लड़के ने जल्दी से कहा, ‘‘आप इन के पति को छुड़वा दीजिए साहब, इन का और कोई नहीं है. मेरा मामा बहुत ही सीधासादा आदमी है. आज तक उस ने कोई गलत काम नहीं किया. जहां हंगामा हुआ था, वहां वह शरबत का ठेला लगाता था. हंगामा करने वाले तो भाग गए, पुलिस मेरे मामा को पकड़ ले गई. अब वे मामा को छोड़ने के लिए 5 हजार रुपए मांग रहे हैं. हमारे पास इतने रुपए नहीं हैं.’’

‘‘लेकिन इस में मैं क्या कर सकता हूं? पुलिस का मामला है, जो कुछ करना होगा, वही करेगी.’’

‘‘आप बहुत कुछ कर सकते हैं साहब.’’ लड़के ने गिड़गिड़ाते हुए कहा.

जानें आगे क्या हुआ कहानी के अगले भाग में…

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