- शैलेंद्र सिंह  

लोकतंत्र में विरोध करने का संविधान में अधिकार दिया गया है. समय के साथसाथ तानाशाही सरकारों को यह पसंद नहीं आ रहा है. विरोध के स्वर को दबाने के लिए अब सरकारें किसी भी हद तक जाने को तैयार हो गई हैं. केवल विपक्षी दलों की आवाज को ही नहीं, बल्कि मीडिया के स्वर को भी दबाया जा रहा है.

राजनीतिक पत्रिका ‘कारवां’ ने जब किसान आंदोलन और अलगअलग मुद्दों पर निष्पक्ष लेखों को छापा, तो राष्ट्रद्रोह जैसे मुकदमे लगा कर आवाज को दबाने का काम किया गया. कई तरह की धमकियां भी मिलीं.

सुलतानपुर की रहने वाली रीता यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को काले झंडे दिखाए, तो जेल से जमानत पर रिहा होने के बाद बदमाशों ने उन की बोलैरो जीप को रोक कर पैर पर गोली मार दी.

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जब मुख्यमंत्री बनने के बाद लखनऊ विश्वविद्यालय के कार्यक्रम में गए, तो समाजवादी पार्टी की नेता पूजा शुक्ला ने उन्हें काले झंडे दिखाए, जिस के बाद पूजा को न केवल जेल भेजा गया, बल्कि उन का उत्पीड़न भी किया गया.

प्रधानमंत्री को काला झंडा दिखाने वाली 35 साल की रीता यादव संतोष यादव की पत्नी हैं. वे सुलतानपुर जिले के चांदा क्षेत्र के लालू का पूरा सोनावा गांव की रहने वाली हैं.

16 नवंबर, 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘पूर्वांचल ऐक्सप्रैसवे’ का लोकार्पण करने के लिए सुलतानपुर पहुंचे थे. सुलतानपुर जिले के अरवलकीरी में रीता यादव ने प्रधानमंत्री को काला झंडा दिखाया. रीता यादव उस समय समाजवादी पार्टी में थीं.

प्रधानमंत्री को काला झंडा दिखाने के आरोप में पुलिस ने रीता यादव को जेल भेज दिया था. कुछ दिन जेल में रहने के बाद रीता यादव को जमानत पर रिहाई मिल गई थी. जेल से रिहा होने के बाद रीता यादव को समाजवादी पार्टी में कोई खास तवज्जुह नहीं मिली.

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